बुधवार, 18 मई 2011

बुदापैश्त- ०३


हलचलों में गुम गली है
रौशनी की खलबली है
शहर में शाम
उतरी है

1 टिप्पणी:

  1. शहर में शाम का आना
    मानो थके परिंदे
    घरोंदों से निकल
    कलरव कर रहे हो
    rachana

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