एक आँगन धूप
कुछ ऐसी क्षणिकाएँ जो गीत तक नहीं पहुँचीं
मेरे अन्य ब्लॉग
Min bopæl - मेरा पता डैनिश में
Чайхана - चाय-गुमटी रूसी में
अभि-अनु सूचनाएँ
चोंच में आकाश
नवगीत की पाठशाला
शुक्रवार चौपाल
शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011
०१. बुदापैश्त
शहर यह
सुंदर बहुत है
धूप की स्मित मधुर है
हवा में ठंडक बहुत है
1 टिप्पणियाँ:
शिखा कौशिक
22 अप्रैल 2011 12:16 pm
bahut mohak abhvyakti ...badhai
प्रत्युत्तर दें
हटाएं
टिप्पणी जोड़ें
अधिक लोड करें...
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुखपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
bahut mohak abhvyakti ...badhai
प्रत्युत्तर देंहटाएं