मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

वसंत

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मौसम की
देहरी से गुज़रता है वसंत
चुप !
हाथ में रोटी और चाय लिये
पेट की भूख न मन का उछाह
कुछ भी जलाता नहीं

3 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीया पूर्णिमा जी, आपके इस ब्लाग पर पहली बार आई हूं। लेकिन आपकी ये संवेदनात्मक क्षणिकायें पढ़कर लगा -----इस अंजुमन में मुझको आना है बार बार----शुभकामनायें। पूनम

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