शुक्रवार, 27 मई 2011

बुदापैश्त - ४


शाम रौशन
काम से छुट्टी
भीड़ गहमह
छतरियों के झुंड
अपनापन स्वजन का
तश्तरी में स्वाद मन का


प्रवासी



उड़ रहे
पंछी प्रवासी
सूर्य की किरणें उदासी
आसमानों में
घटा सी

बुधवार, 18 मई 2011

बुदापैश्त- ०३


हलचलों में गुम गली है
रौशनी की खलबली है
शहर में शाम
उतरी है

शुक्रवार, 13 मई 2011

अम्मा पढ़ती है


काम काज में बचपन बीता
काम काज में गई जवानी
उम्र गए पर
फुरसत पाकर
अब देखो अम्मा पढ़ती है